2 दिसंबर 2024 - 14:17
संभल हिंसा पर फूटा फ़ारूक़ अब्दुल्लाह का ग़ुस्सा, मुसलमान सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे

24 करोड़ मुसलमानों को समुद्र में नहीं फेंका जा सकता। सरकार को मुसलमानों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। हमारे संविधान में धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है।

वरिष्ठ राजनेता और जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्लाह ने देश में धार्मिक स्थलों पर जारी विवाद विवाद को लेकर केंद्र सरकार को खरी खरी सुनाते हुए कहा कि देश का माहौल ऐसा कर दिया गया है कि मुसलमान खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जैसे संविधान द्वारा गारंटी दी गई है उसमें धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को मुसलमानों के साथ बिना किसी भेदभाव के व्यवहार करना चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं है कि मुसलमान असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

फारूक अब्दुल्लाह ने कहा कि मैं भारत सरकार से इसे रोकने के लिए कहूंगा। 24 करोड़ मुसलमानों को समुद्र में नहीं फेंका जा सकता। सरकार को मुसलमानों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। हमारे संविधान में धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है।